सोमवार, 4 जनवरी 2010

संविधान बेकार

घटते खेत, बढ़ता धुआं।
भूखा किसान, सुखा कुआँ॥
न्याय में देरी, महंगी चंगेरी।
मुनसिफी बहरी, सोते प्रहरी॥
अय्याश सरकार, नौजवान बेगार।
पुलिसिया अत्याचार, इन्सान लाचार॥
क्रिकेट में जीत, ज़िन्दगी में हार।
राष्टियता आगे, संविधान बेकार॥
(इमरान अली)

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